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हे भारत के राम जगो - आशुतोष राणा | He Bharat Ke Raam Jago - Aashutosh Rana

हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हे जगाने आया हूँ, सौ धर्मों का धर्म एक, बलिदान बताने आया हूँ । सुनो हिमालय कैद हुआ है, दुश्मन की जंजीरों में आज ...

वह हृदय नहीं है पत्थर है (स्वदेश) - गया प्रसाद शुक्ल 'सनेही' | Wo Hriday Nhi Hai Patthar Hai - Gaya Prasad Shukla 'Sanehi'

वह हृदय नहीं है पत्थर है,  जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥  जो जीवित जोश जगा न सका,  उस जीवन में कुछ सार नहीं।  जो चल न सका संसार-संग,  उसका हो...

हिंदुस्तान हमारा है - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' | Hindustan Hamara Hai - BaalKrishna Sharma 'Naveen'

कोटि-कोटि कंठों से निकली, आज यहीं स्वर धारा है, भारतवर्ष हमारा है, यह हिन्दुस्तान हमारा है। जिस दिन सबसे पहले जागे, नव सिरजन के स्वप्न घने, ...

तू ज़िंदा है तो - शंकर शैलेंद्र | Tu Zinda Hai To - Shankar Shailendra

तू जिंदा है तो.. तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार...

जननी जन्मभूमि - सुमित्रानंदन पंत | Janani Janmbhoomi - Sumitranandan Pant

जननी जन्मभूमि प्रिय अपनी जो     स्वर्गादपि     गरीयसी। जिसका गौरव भाल हिमाचल स्वर्ण धरा हँसती चिर श्यामल, ज्योतिग्रथित गंगा-यमुना जल ...

भारत की शक्ति - देशभक्ति कविता | Bharat Ki Shakti - Deshbhakti Kavita

भारत की शक्ति न यह समझो कि हिन्दुस्तान की तलवार सोई है।  जिसे सुनकर दहलती थी कभी छाती सिकन्दर की, जिसे सुन करके ‘कर’ से छूटती थी तेग़ ...

और भी दूँ - रामावतार त्यागी | Aur Bhi Doon - Ramavtar Tyagi

और भी दूँ - रामावतार त्यागी मन समर्पित, तन समर्पित, और यह जीवन समर्पित। चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ। माँ तुम्‍हारा ऋण ब...

हिमालय के प्रति - रमानाथ अवस्थी | Himalaya Ke Prati - Ramanath Awasthi

हिमालय के प्रति भारत के शीश हिमालय को,          है मेरा बारम्बार नमन ! सबसे पहले जिसके माथे पर-          सूरज तिलक लगाता है, ...

सच्चा भारत - रामधारी सिंह दिनकर | Sachcha Bharat - Ramdhari Singh Dinkar

सच्चा भारत - रामधारी सिंह दिनकर वृथा मत लो भारत का नाम। मानचित्र में जो मिलता है, नही देश भारत है। भू पर नहीं, मनों में ही बसा, कहीं ...

सत्कर्तव्य - रामनरेश त्रिपाठी | Satkartvya - Ramnaresh Tripathi

जग में सचर-अचर जिनते हैं, सारे कर्म निरत हैं। धुन है एक-न-एक सभी को, सबके निश्चित व्रत हैं। जीवनभर आतप सह वसुधा पर छाया करता है। तुच्...

मैं सेना का जवान हूँ - प्रह्लाद सिंह | Main Sena Ka Jawan Hun - Prahlad Singh

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता, poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। माना की घर से दूर हूं, यूं ना समझो क...

मातृभूमि - मैथलीशरण गुप्त | Matribhoomi - Maithilisharan Gupt

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता, poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। नीलांबर परिधान हरित तट पर सुन्दर है। सूर्...

झाँसी की रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान | Jhansi Ki Rani - Subhadra Kumari Chauhan

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी...