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यह कदंब का पेड़ - सुभद्रा कुमारी चौहान | Yeh Kadam Ka Ped - Subhdra Kumari Chauhan

यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥ ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली। किसी तरह नीची ...

झाँसी की रानी - सुभद्रा कुमारी चौहान | Jhansi Ki Rani - Subhadra Kumari Chauhan

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी...