latest posts

यह कदंब का पेड़ - सुभद्रा कुमारी चौहान | Yeh Kadam Ka Ped - Subhdra Kumari Chauhan

यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्हैया बनता धीरे-धीरे॥ ले देतीं यदि मुझे बांसुरी तुम दो पैसे वाली। किसी तरह नीची ...

काँटों में राह बनाते हैं - रामधारी सिंह 'दिनकर' | Kanto Me Raah Banate Hain - Ramdhari Singh 'Dinkar'

सच है विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है। सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते। विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनात...

चाँद का कुरता - रामधारी सिंह 'दिनकर' | Chand Ka Kurta - Ramdhari Singh 'Dinkar'

हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, “सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। सनसन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ, ठिठुर-ठिठुरकर कि...

सतपुड़ा के घने जंगल - भवानी प्रसाद मिश्र | Satpura Ke Ghane Jungle - Bhawani Prasad Misr

सतपुड़ा के घने जंगल। नींद में डूबे हुए से ऊँघते अनमने जंगल। झाड़ ऊँचे और नीचे, चुप खड़े हैं आँख मींचे, घास चुप है, कास चुप है मूक शाल, पलाश ...

कहब तऽ लाग जाई धक से -गोरख पांडेय | Kahab Ta Laag Jayi Dhak se - Gorakh Pandey

कहब तऽ लाग जाई धक् से, धक् से कहब तऽ लाग जाई धक् से बड़े-बड़े लोगन के बंगला दो बंगला अउर भईया झूमर अलग से कहब तऽ लाग जाई धक् से हमरे गरीबन के ...

हे भारत के राम जगो - आशुतोष राणा | He Bharat Ke Raam Jago - Aashutosh Rana

हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हे जगाने आया हूँ, सौ धर्मों का धर्म एक, बलिदान बताने आया हूँ । सुनो हिमालय कैद हुआ है, दुश्मन की जंजीरों में आज ...

आदमी नामा - नज़ीर अकबराबादी | Aadmi Naama - Nazeer Akbarabadi

दुनिया में बादशाह है सो है वह भी आदमी और मुफ़्लिस-ओ-गदा है सो है वो भी आदमी, ज़रदार बेनवा है सो है वो भी आदमी निअमत जो खा रहा है सो है वो भी...

नए इलाके में - अरुण कमल | Naye Ilake Mein - Arun Kamal

इन नए बसते इलाकों में जहाँ रोज़ बन रहे हैं नए-नए मकान मैं अकसर रास्ता भूल जाता हूँ धोखा दे जाते हैं पुराने निशान खोजता हूँ ताकता पीपल का पेड...

अग्नि पथ - हरिवंशराय बच्चन | Agni Path - Harivanshray Bachchan

अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हों घने, हों बड़े, एक पत्र-छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ...

गीत अगीत - रामधारी सिंह दिनकर | Geet Ageet - Ramdhari Singh Dinkar

गीत, अगीत, कौन सुंदर है? गाकर गीत विरह के तटिनी  वेगवती  बहती  जाती है, दिल हलका कर लेने को उपलों से कुछ कहती जाती है। तट पर एक गुलाब सोचता,...