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मातृभूमि - मैथलीशरण गुप्त | Matribhoomi - Maithilisharan Gupt

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता, poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। नीलांबर परिधान हरित तट पर सुन्दर है। सूर्...

ग्राम्य जीवन - मैथलीशरण गुप्त | Gramy Jeevan - Maithilisharan Gupt

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता,  poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। अहा ग्राम्य जीवन भी क्या है, क्यों न इस...

नर हो न निराश करो मन को - मैथलीशरण गुप्त | Nar Ho Na Nirash Karo Man Ko - Maithilisharan Gupt

A man in tension नर हो, न निराश करो मन को कुछ काम करो, कुछ काम करो जग में रह कर कुछ नाम करो यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो समझो जिसमें ...