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अग्नि पथ - हरिवंशराय बच्चन | Agni Path - Harivanshray Bachchan

अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ! वृक्ष हों भले खड़े, हों घने, हों बड़े, एक पत्र-छाँह भी माँग मत, माँग मत, माँग मत! अग्नि पथ! अग्नि पथ! अग्नि पथ...

पथ की पहचान - हरिवंशराय बच्चन | Path Ki Pahchan - Harivanshrai Bachchan

पथ की पहचान पूर्व   चलने  के   बटोही बाट की पहचान कर ले। पुस्तको     में    है   नहीं छापी गई उनकी कहानी, हाल  इसका  ज्ञात ...

मनुष्य की मूर्ति - हरिवंश राय बच्चन | Manushya Ki Murti - Harivansh Rai Bachchan

देवलोक से मिट्टी लाकर मैं मनुष्य की मूर्ति बनाता! रचता मुख जिससे निकली हो वेद-उपनिषद की वर वाणी, काव्य-माधुरी, राग-रागिनी जग-जीवन के ...

जो बीत गई सो बात गई - हरिवंश राय बच्चन | Jo Beet Gayi So Baat Gayi - Harivansh Rai Bachchan

जो बीत गई सो बात गई जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अम्बर के आनन को देखो कितने इसके तारे टूटे कि...

सब ग्रह गाते, पृथ्वी रोती - हरिवंशराय बच्चन | Sab Grah Gate, Prithvi Rotee - Harivansh Rai Bachchan

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता,  poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। सब ग्रह गाते, पृथ्वी रोती। ग्रह-ग्रह प...

मधुशाला - हरिवंश राय बच्चन | Madhushala - Harivansh Rai Bachchan

मधुशाला मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग प...