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सिंहासन खाली करो कि जनता आती है - रामधारी सिंह दिनकर | Sinhansan Khali Karo Ki Janta Aati Hai

सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है; दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है...

काँटों में राह बनाते हैं - रामधारी सिंह 'दिनकर' | Kanto Me Raah Banate Hain - Ramdhari Singh 'Dinkar'

सच है विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है। सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते। विघ्नों को गले लगाते हैं, काँटों में राह बनात...

चाँद का कुरता - रामधारी सिंह 'दिनकर' | Chand Ka Kurta - Ramdhari Singh 'Dinkar'

हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, “सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। सनसन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ, ठिठुर-ठिठुरकर कि...

गीत अगीत - रामधारी सिंह दिनकर | Geet Ageet - Ramdhari Singh Dinkar

गीत, अगीत, कौन सुंदर है? गाकर गीत विरह के तटिनी  वेगवती  बहती  जाती है, दिल हलका कर लेने को उपलों से कुछ कहती जाती है। तट पर एक गुलाब सोचता,...

शक्ति और क्षमा - रामधारी सिंह दिनकर | Shakti Aur Kshama - Ramdhari Singh Dinkar

क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ, कब हारा? क्षमाशील हो रिपु-समक्ष तुम हुये विनत जितना ही द...

सच्चा भारत - रामधारी सिंह दिनकर | Sachcha Bharat - Ramdhari Singh Dinkar

सच्चा भारत - रामधारी सिंह दिनकर वृथा मत लो भारत का नाम। मानचित्र में जो मिलता है, नही देश भारत है। भू पर नहीं, मनों में ही बसा, कहीं ...

जनतंत्र का जन्म - रामधारी सिंह दिनकर | Jantantra Ka Janam - Ramdhari Singh Dinkar

जनतंत्र सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,  मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;  दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,  सिंहासन खाल...

कृष्ण की चेतावनी - रामधारी सिंह दिनकर | Krishna Ki Chetawani - Ramdhari Singh Dinkar

कविता, हिंदी कविता, हिंदी में कविता, poems in hindi, Hindi poems के लिए हमें सब्सक्राइब करें। वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नो...

हमारे कृषक - रामधारी सिंह दिनकर | Our Farmers - Ramdhari Singh Dinkar

छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई याम नहीं है  मुख में जीभ शक्ति भुजा में जीवन में सुख का नाम नहीं है  वसन कहाँ? सूखी रोटी भी मिलती दोनों...