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समुद्र - सीताकांत महापात्र | Samudra- Sitakant Mahapatra

समुद्र का कुछ भी नहीं होता । मानो अपनी अबूझ भाषा में कहता रहता है जो भी ले जाना हो ले जाओ जितना चाहो ले जाओ फिर भी रहेगी बची देने की अभ...