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एक फूल की चाह - सियाराम शरण गुप्त | Ek Phool Ki Chaah - Siyaram Sharan Gupt

एक फूल की चाह उद्वेलित कर अश्रु-राशियाँ,               हृदय-चिताएँ धधकाकर, महा महामारी प्रचण्ड हो               फैल रही थी इधर उधर।...

समय - सियारामशरण गुप्त | Samay - Siyaramsharan Gupt

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अभी समय है, अभी नहीं कुछ भी बिगड़ा है - सियारामशरण गुप्त

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