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लौट चलें प्रकृति की ओर - व्यग्र पाण्डे | Laut Chalen Prakrti Ki Or - Vyagra Pandey

लौट चलें फिर से हम  माँ प्रकृति की ओर । पेड़ों की पंचायत जहाँ  नाँच रहे हों मोर ।। नदी-पहाड़ जंगल की शोभा   झरनों का हो शोर । जहाँ साँझ मंदि...